मेरी दर्द वाली रातों की नज़र उतार देना ये गर रहीं सलामत तो महका करेंगी ग़ज़लें फ़स्ले बहार आलम में आँखों का नम रहना खुश मौसमों मे...
मेरी दर्द वाली रातों की नज़र उतार देना ये गर रहीं सलामत तो महका करेंगी ग़ज़लें फ़स्ले बहार आलम में आँखों का नम रहना खुश मौसमों मे...
Share सूखे पत्तों को जब आकर हवा उड़ाती है शाख के पत्तों की भी रूह कांप जाती है दरख़्त अपने ही पत्तों का हो नहीं पाता चिड़िया पागल है वहां घोंसल...
Share परिंदों शाम को लौट आना घर ज़रा ज़ल्दी हम दीवारें इस ख़ामोशी से ऊब जातीं हैं उतने ही दानें चुनो जितनी ज़रूरत है हमें यहां कितनी च...
Share वो मेरे ही साथ-साथ चलता रहा आंखों में झूठा ख़्वाब पलता रहा कुछ तो मिट्टी ही अपनी गीली है बारिश में घर से मैं निकलता रहा तेरा ख़...
अब आंखें बंद कैसे मैं कर सकूं बताओ तस्वीर देके तुम मुझे जगराते दे गए हो कोई नहीं यहाँ पर फिर भी नहीं अकेला याद आके मुझको महफिल में ले ...
Share इस कहानी का बूढ़ा नायक दीवाली पर अपना पुराना बक्सा खोलता है और उसमें रखा पुराना सामान देखकर उसे अपने बीते वक्त की याद आ जाती है त...