ज़िंदगी ये मेरी बहुत कम है पड़ गयी उनको है भूलना तो ख़ुदा और उम्र दे दर्द मेरे घर का आंगन भी है बिस्तर भी कुछ कोने अभी खाली ख़ुद...
ज़िंदगी ये मेरी बहुत कम है पड़ गयी उनको है भूलना तो ख़ुदा और उम्र दे दर्द मेरे घर का आंगन भी है बिस्तर भी कुछ कोने अभी खाली ख़ुद...
मैंने अपने उपन्यास व्यास-गादी के लेखन के दौरान कुछ समय ब्रज क्षेत्र में बिताया। कहानी का अधिकांश भाग ब्रज में ही घटित होता है इसलिए यह आवश...
दीप खिलखिलाएंगे शरारती बच्चों की तरह इस बार भी दीवाली पर जैसे बाग के आम-अमरूदों पर फेंककर पत्थर हैं भागते जैसे गेंद से तो...
मैं शब्द से होकर विलग धारण कैसे कर सकता हूँ मौन वहां जहां मिट्टी भी शीश पर धर अग्नि-शिखा करती है संघर्ष अंध...
चिराग़ मुत्मइन चिराग़ जो होते जलते हुए करते न सफ़र अंधेरों की खि़लाफ़त में यूं लड़ते रहते ना उम्र तलक आहन को पिघलाने वाले...
ये दीप नहीं दीप हैं हृदय का संगीत है रोशनी के राग में ढली हुई ये प्रीत है अग्नि शीश पर धरे जी रहे वो कौन हैं हैं रा...
(होशंगाबाद,मध्यप्रदेश के युवा उपन्यासकार अशोक जमनानी जो पिछले सालों अपने तीन उपन्यासों के जरिये साहित्य जगत में चर्चित रहे, से हाल ही में की...