ज़िंदगी ये मेरी बहुत कम है पड़ गयी उनको है भूलना तो ख़ुदा और उम्र दे दर्द मेरे घर का आंगन भी है बिस्तर भी कुछ कोने अभी खाली ख़ुद...
ज़िंदगी ये मेरी बहुत कम है पड़ गयी उनको है भूलना तो ख़ुदा और उम्र दे दर्द मेरे घर का आंगन भी है बिस्तर भी कुछ कोने अभी खाली ख़ुद...
सुना है मेरा दिल दुखाएगा दोस्त है दोस्ती निभाएगा वो आंखों में शर्म रखता है सिर झुकाकर ही कतराएगा भीड़ में वो एहसान कर देगा नज़रें मिलीं...