दीप खिलखिलाएंगे शरारती बच्चों की तरह इस बार भी दीवाली पर जैसे बाग के आम-अमरूदों पर फेंककर पत्थर हैं भागते जैसे गेंद से तो...
दीपावली: दीप-नवम्
ध्वांत से न क्लांत हों धारण करें शुभ पंथ का ज्योतिर्मयी-ज्योतिर्मयी वह चेतना ही लक्ष्य हो अनंत वह प्रकाश हो उर्ध्...
दीपावली: दीप-अष्टम्
मैं शब्द से होकर विलग धारण कैसे कर सकता हूँ मौन वहां जहां मिट्टी भी शीश पर धर अग्नि-शिखा करती है संघर्ष अंध...
दीपावली: दीप-षष्ठ
चिराग़ मुत्मइन चिराग़ जो होते जलते हुए करते न सफ़र अंधेरों की खि़लाफ़त में यूं लड़ते रहते ना उम्र तलक आहन को पिघलाने वाले...
दीपावली: दीप-पंचम
ये दीप नहीं दीप हैं हृदय का संगीत है रोशनी के राग में ढली हुई ये प्रीत है अग्नि शीश पर धरे जी रहे वो कौन हैं हैं रा...
दीपावली: दीप-चतुर्थ
ओ सुशोभित दीप पावन लज्जा तुम्हें आती नहीं जहां रोशनी बहुत है तुम भी वहां जाकर बसे मिट्टी मिली थी जब तुम्हें ली ...
दीपावली: दीप-तृतीय
तिमिर पथ पर हूँ प्रतीक्षित तुम मुझे आलोक दे दो दीपक तुम्हारी सम्पदा वह रौशनी का लोक दे दो रौशनी के बीज बोकर पाऊं उजाले ल...
दीपावली: दीप-द्वितीय
रौशन खुशियों का आलम हो घर मेरे घर तेरे भी आंगन के दीपक से हारें नभ के गहरे अंधेरे भी इक आंगन के उजाले में कहां बात निराली होती है ज...
दीपावली: दीप-प्रथम
गांव की मिट्टी के दीपक हैं गांव की ही तो बाती है फिर क्यों ये जगमग रोशनियां गांवों तक पहुँच न पाती हैं हम रुके बहुत अब चलें ...