Share ओ पथिक तू चल अकेला कारवां बन जायेगा जीवन समर को कर समर्पित तू अमर हो जायेगा ना आंसुओं का अर्ध्य हो न पीर की परवाह हो...
Share ओ पथिक तू चल अकेला कारवां बन जायेगा जीवन समर को कर समर्पित तू अमर हो जायेगा ना आंसुओं का अर्ध्य हो न पीर की परवाह हो...
Share कभी सुना है गीत श्रमिक का जो वो रातों में गाता है सूरज संग जल-जल जो पाया गाकर उसे भुलाता है कभी सुना है गीत पथिक का राह में जो दोह...
Share तू बांधने चला मुझे मैं बंध न पाऊंगा है प्रीत की ये रीत मैं कैसे निभाऊंगा बादलों से जो गिरी वो पहली बूँद मैं गिरके खो जाऊं कहां कै...