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गुरुवार, जून 10, 2010
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ग़ज़ल: वक्त

बेवफ़ाई पे जब भी आता है वक्त तेरी तरह मुस्कराता है मेरे पर काटना वही चाहेगा उड़ना जो अभी सिखाता है बातें करना उसे पसंद नहीं ख़ामोश रहो ...

 
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