उर्वशी में प्रकाशित कहानी : टिकिट कहानी : टिकिट : अशोक जमनानी एक - दो - तीन -चार - पांच - छह - सात ...
उर्वशी में प्रकाशित कहानी : टिकिट कहानी : टिकिट : अशोक जमनानी एक - दो - तीन -चार - पांच - छह - सात ...
Share आजकल पथिक जी की लघु-कथाओं की तूती बोल रही है। साहित्यिक बिरादरी की प्रशंसा और ईर्ष्या मिश्रित आलोचना भी मुखर है। पथिक जी की...
Share मंत्री जी के पेट में रह-रह कर दर्द उठता। दिन पर दिन बीतते जा रहे थे लेकिन दवा और दुआ दोनों ही बेअसर सिद्ध हो रहीं थ...
Share पुरानी सड़क जिसे बस इसलिए सड़क कहा जाता था क्योंकि सरकारी रिकार्ड में वो सड़क के रूप में दर्ज थी। गढ्ढे इतने अधिक थे कि ...
Share छोटे से शहर का छोटा सा मोहल्ला ऐसी ज़गहों पर तो ख़बर आग की तरह फैलती है; बस फैल गयी। सिपाही रामलाल की लड़की किसी दूसरी जात...
Share धूप ऐसी कि लगे जैसे देह पांच के बजाय चार तत्त्व की ही रह जाएगी; जल तो मानो पूरा का पूरा ...