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सोमवार, जुलाई 15, 2013
'खम्मा' पर डॉ राजेंद्र सिंघवी की समीक्षात्मक टिप्पणी

'खम्मा' पर डॉ राजेंद्र सिंघवी की समीक्षात्मक टिप्पणी

6:13:00 pm

जुलाई-2013 अंक  (यह समीक्षात्मक टिप्पणी ,  अपनी माटी के तीन वर्ष पूरे होने पर चित्तौड़ में आयोजित समारोह में  डॉ राजेन्द्र कुमार सिं...

शुक्रवार, जून 28, 2013
"निर्धनता को शापित एक समाज की समृद्धि का अभिलेख – बूढ़ी डायरी"

"निर्धनता को शापित एक समाज की समृद्धि का अभिलेख – बूढ़ी डायरी"

2:09:00 pm

भारत क्या है? इस प्रश्न पर विवादों का कोई अंत नहीं है। एक वर्ग है जो भारत को यूरोप की तरह अनेक संस्कृतियों का एक बेमेल समुच्च्य मानता ...

सोमवार, फ़रवरी 14, 2011
मेरे नए उपन्यास''छपाक-छपाक'' पर रेणु व्यास की राय

मेरे नए उपन्यास''छपाक-छपाक'' पर रेणु व्यास की राय

‘छपाक-छपाक’ अशोक जमनानी का नवीन उपन्यास है। इस उपन्यास में नर्मदा में डुबकी लगा कर सिक्के बटोरने वाले एक बच्चे ‘नंदी’ की अछूती ज़िंदगी का व...

शनिवार, फ़रवरी 12, 2011
''छपाक-छपाक'' उपन्यास पर माणिक की राय

''छपाक-छपाक'' उपन्यास पर माणिक की राय

होशंगाबाद के अशोक जमनानी जिन्हें उनकी कविताओं के साथ ही संस्कृतिकर्म के ज़रिए तो जाना जाता है ही ,मगर साथ ही पिछले कुछ सालों में उनके तीन उ...

 
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