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शनिवार, मार्च 03, 2018
शनिवार, जनवरी 03, 2015
नर्मदा यात्रा : 32 : एक कविता बरगी से

नर्मदा यात्रा : 32 : एक कविता बरगी से

नर्मदा यात्रा : 32 : एक कविता बरगी से  नर्मदा तुम्हें निहारने के लिए पूरे चाँद वाली रात में मैंने चाँद बोया बरगी के आसमान में...

शुक्रवार, मार्च 14, 2014
कविता : पलाश के फूलों वाले रंग

कविता : पलाश के फूलों वाले रंग

कविता : पलाश के फूलों वाले रंग जो शाख से जुदा हुए  फिर मिट गए तुम्हारे लिए  उन पलाश के फूलों वाले रंग हैं इन्हें पास आन...

गुरुवार, अगस्त 29, 2013
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हे राजन

हे राजन हे वयोवृद्ध राजन असुरक्षित सीमाएँ रिक्त कोष भ्रष्ट तंत्र सुप्त न्याय लोभी आमात्य लुटेरे  व्यवसायी अपमानित नारी भ्रमित य...

रविवार, अगस्त 25, 2013
 कविता : नर्मदा लौट गयी

कविता : नर्मदा लौट गयी

कविता : नर्मदा लौट गयी नर्मदा लौट गयी नर्मदा अपने तटबंधों के मध्य नदी ने राह पकड़ ली पुरानी तो शहर सुकून महसूसता है पूजन पाठ श...

 
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